इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत में कैसे पेश करें? | धारा 65B भारतीय साक्ष्य अधिनियम | Expert Vakil
आज के डिजिटल युग में अपराध और विवाद केवल दस्तावेज़ों या मौखिक गवाही तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब ईमेल, व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया पोस्ट जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (Electronic Evidence) अदालत में अहम भूमिका निभाते हैं।
लेकिन, इन सबको सीधे कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता। इसके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 65B के तहत कुछ कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना ज़रूरी है।
🔹 धारा 65B भारतीय साक्ष्य अधिनियम क्या कहती है?
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धारा 65B विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के प्रमाण (admissibility of electronic records) से संबंधित है।
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यदि कोई इलेक्ट्रॉनिक डेटा अदालत में सबूत के तौर पर प्रस्तुत करना है, तो वह तभी स्वीकार्य होगा जब उसके साथ 65B का सर्टिफिकेट (Certificate under Section 65B) लगाया गया हो।
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इस प्रमाणपत्र को उस व्यक्ति द्वारा दिया जाना चाहिए जो उस कंप्यूटर, लैपटॉप, सर्वर या डिवाइस को चलाता है या उसके नियमित कार्यों का जिम्मेदार है।
🔹 इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत में पेश करने की प्रक्रिया
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साक्ष्य इकट्ठा करना
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मोबाइल, कंप्यूटर, सीसीटीवी, सर्वर, ईमेल या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से आवश्यक डेटा सुरक्षित रखें।
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डेटा को बदलने या एडिट करने से बचें, क्योंकि कोर्ट में छेड़छाड़ पाए जाने पर साक्ष्य खारिज हो सकता है।
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प्रिंटआउट या डिजिटल कॉपी तैयार करना
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ईमेल, चैट या रिकॉर्डिंग का प्रिंटआउट या डिजिटल कॉपी (CD/DVD/Pen Drive) तैयार की जाती है।
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सेक्शन 65B सर्टिफिकेट बनाना
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इसमें यह उल्लेख होना चाहिए कि यह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उसी डिवाइस से प्राप्त किया गया है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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यह प्रमाणपत्र अधिकृत व्यक्ति (जैसे IT Head, Service Provider, या Data Controller) द्वारा साइन होना चाहिए।
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अदालत में पेश करना
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इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को उसकी डिजिटल कॉपी के साथ और धारा 65B प्रमाणपत्र जोड़कर कोर्ट में प्रस्तुत किया जाता है।
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बिना प्रमाणपत्र के कोर्ट ऐसे साक्ष्य को स्वीकार नहीं करेगी।
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🔹 सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले
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अनवर पी.वी. बनाम के. बसीर (2014)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना धारा 65B सर्टिफिकेट के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत में मान्य नहीं होगा। -
अरुणा रॉय बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2017)
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तभी वैध होगा जब धारा 65B का पालन किया गया हो।
🔹 धारा 65B सर्टिफिकेट में क्या होना चाहिए?
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इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड किस डिवाइस से लिया गया है, इसका विवरण।
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डिवाइस के संचालन की विधि और उसका नियमित उपयोग।
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यह घोषणा कि डेटा मूल (original) है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।
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प्रमाणपत्र देने वाले व्यक्ति का नाम, पद और हस्ताक्षर।
✅ निष्कर्ष
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आज अदालतों में सबसे मजबूत गवाही मानी जाती है, लेकिन केवल तब जब उसे सही कानूनी प्रक्रिया से पेश किया जाए।
धारा 65B भारतीय साक्ष्य अधिनियम का पालन करके ही इलेक्ट्रॉनिक डेटा को सबूत के रूप में अदालत में स्वीकार करवाया जा सकता है।
👉 इसलिए, यदि आप किसी केस में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो उसे सही तरीके से सुरक्षित रखें और धारा 65B सर्टिफिकेट के साथ कोर्ट में पेश करें।
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